करौली के जादों (पौराणिक यादव /यदुवंशी ) चन्द्रवंशी क्षत्रियों के अमरगढ़ दुर्ग एवं वहां के तत्कालीन शासकों का इतिहास —

करौली जादों (पौराणिक यादव /यदुवंशी ) चन्द्रवंशी  क्षत्रियों के अमरगढ़ दुर्ग एवं वहां के तत्कालीन शासकों का ऐतिहास—-

करौली रियासत  में अमरगढ़ जिरोता तहसील के अंतर्गत एक मजबूत प्रसिद्ध ठिकाना रहा है । यह जिरोता के उत्तर-पूर्व में लगभग10किलोमीटर दूरी पर स्थित है ।यह ठिकाना एक बहुत ही समृद्ध  लोगो का गांव माना जाता था ।अमरगढ़ गांव एक एक पहाड़ी पर आंशिकरूप से स्थित है ।

अमरगढ़ के पहले जागीरदार ठाकुर अमरमन रहे जो करौली के राजा जगोमन के पुत्र थे ।जगोमन का परिवार बहुत बड़ा था ।इनके वंशज मुकुन्द के जादों कहे जाते है जिनकी संख्या करौली राज्य में बहुत अधिक है ।

अमरगढ़ के ठाकुर  को हाड़ौती के ठाकुर की तरह 25 घोड़े एवं 200 पैदल सैनिकों की सेना रखने की मान्यता थी ।अमरगढ़ दुर्ग का निर्माण अमरमन ने करवाया था तथा दुर्ग के नीचे आवादी विकसित कराई थी ।यहां के ठाकुरों का आमतौर पर अपने शासकों से मतभेद रहा करता था।ऐसा कहा जाता है कि जब मरहटों का करौली राजपरिवार के साथ युद्ध हुआ था तो अमरगढ़ का राव , सिंधिया से मिल गया था क्यों उसकी काफी जमींदारी चम्बलपार सबलगढ़ में थी ।जब सिंधियाऔर उसके फ्रांसीसी जनरल बेपटिस्ट ने चढ़ाई की तो अमरगढ़ के ठाकुर की धोकाधड़ी में सबलगढ़ व चम्बल के दक्षिण किनारे का क्षेत्र सन 1795 ई0 में करौली राजपरिवार से छिन गया था तथा ग्वालियर में मिलगया।अब अमरगढ़ ठाकुर सबलगढ़ एस्टेट की2000रुपये रिवेन्यू ग्वालियर सिंधिया को प्रदान करता था ।

महाराजा माणिक पाल   (1722-1804 ई0) के शासन में कुंवर अमोलकपाल ने सन 1802 ई0 में अमरगढ़ किला वहां के ठाकुरों से छीन लिया।इसी प्रकार महाराजा हरबक्स पाल ने  भी अपने समय(सन 1804-  1837 ई0 ) में ,इस गढ़ को एक बार पुनः जब्त कर लिया था।
महाराजा प्रताप पाल (सन 1838-1849ई0) के समय में अमरगढ़  के ठाकुर लक्ष्मण चन्द करौली राजपरिवार के  विरोधिययों की मदद   नरसिंह पाल के  करौली की गद्दी पर बैठेने के कुछ महीनों तक करते रहे ।ठाकुर अमरगढ़ को विरोधियों की मदद करने के इल्जाम में सन 1847 ई0 में पन्द्रह हजार रुपये के दण्ड से  जयपुर कोर्ट ने दण्डित किया था ,तथा आदेश दिया गया कि इस धन राशि को करौली में सार्वजनिक कार्य में खर्च किया जाय।यह गढ़ आज भी सुरक्षित है जिसमें वहां के  ठाकुरों के वंशज रहते है ।इस दुर्ग से कुछ ही दूरी पर क्षेत्र की प्रसिद्ध गुफा घण्टेश्वर है ,जो वन्यजीवों के साथ अपनी प्राकृतिक सम्पदा से अकूत है ।

सन्धर्व —-
1-गज़ेटियर ऑफ करौली स्टेट -पेरी पौलेट,1874
2-करौली राज्य की ख्यात
3-करौली पोथी जगा स्वर्गीय कुलभानसिंह ,अकोलपुरा
4-करौली का इतिहास -लेखक महावीर प्रसाद शर्मा
5-करौली राज्य का इतिहास -दामोदर लाल गर्ग
6-करौली जिले का सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक अध्ययन-लेखक रतन लाल
7-वीर-विनोद -लेखक स्यामलदास
8-राजपूताने का इतिहास -लेखक जगदीश सिंह गहलोत
9-ए गैज़ेटर ऑफ ईस्टर्न राजपुताना (भरतपुर ,धौलपुर एवं करौली )स्टेट्स -एच0 ई0 ड्रेक-बोचमन ,1905

लेखक–– डॉ. धीरेन्द्र सिंह जादौन 
गांव-लाढोता, सासनी
जिला-हाथरस ,उत्तरप्रदेश
एसोसिएट प्रोफेसर ,कृषि विज्ञान
शहीद कैप्टन रिपुदमन सिंह ,राजकीय महाविद्यालय ,सवाईमाधोपुर ,राजस्थान ,322001

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