History of Karauli State in Modern period from 15th to 18th century—

Between AD 1589 and 1734, the small Rajput Yaduvamshi (or Yadavas) kingdom of Karauli was ruled in succession by Dwarka Das, Mukund Das, Jagman, Chhatraman, Dharmapal, Ratanpal and Kanwarpal II (r. 1691-1734.) The period was generally marked by an overall state of confusion and dissension. Internal palace squabbles and harem intrigues added to the disorder. …

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जदुवंश शिरोमणि जादोंपति श्री देवकीनन्दन श्री कृष्ण की सन्तति एवं उनकी महत्ता —

जदुकुल शिरोमणि जादोंपति देवकीनन्दन श्रीकृष्ण की सन्तति एवं उनकी महत्ता ——– 1 – रुक्मणी जी से विवाह – रुक्मणी जी के पिता महाराज भीष्मक भी यदुवंश की विदर्भ शाखा में आते है ।राजा विदर्भ ऐक्ष्वावंशी राजा सगर के समकालीन थे ।राजा विदर्भ अपनी पुत्री सुकेशिनी का विवाह सगर से करके दक्षिण की ओर चले गये …

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A Brief Sketch of History of Lunar race Yadava Dynasty of Rajputs —-

A Brief Sketch of the history of the Lunar race Yadava Dynasty of Rajputs — In early times the Yamuna was the southern boundary for those Vedic Aryan settlers who might have set up frontier outposts on or near the site on Brajamndal.The earliest Aryan tribe , which came to be associated with this Braj …

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Jadu Ruler Vijayapala of Bayana (Sripatha )raised the high flag of “Hindwan “in foreign Countries—

Jadu ruler Vijayapal  of Bayana(Sripatha) raised the high flag of “Hindwan ” in foreign Countries— Maharaja Vijayapal of Shripatha (Bayana ) , the 88th in descent of  Shri Krishna.He was a powerful ruler , and he extended his empire .The Surasena Yadava dynasty of Karauli began with Vijayapala .He migrated from Mathura and settled in …

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Maharaja Dharampal :The 77th in descent of Krishna was real founder of Jadon family of Bayana —

Maharaja DharmPal : The 77th in descent of Krishna was real founder of Jadon family of Bayana— People of Jadon race are, generally , credited as natives of Mathura and Saurashtra regions.Literary and epigraphic sources also support the rule of Yadavas or Jadons in Mathura ,Dang and Mewat regions of Rajasthan either as independent of …

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यदुकुल शिरोमणि वासुदेव श्री कृष्ण जी के जन्म एवं नामकरण -संस्कार के विषय में जाने–

– वसुदेवस्य तनयो यदोवंशसमुद्दव : । मुचुकुंदोअपि तत्रासौ वृद्ध गागर्य वचोत्स्मरत।। पुरा गार्ग्यऐंन कथितमष्टा विंशतिमे युगे । द्वापरान्ते हरेजन्म यदुवंशे भविष्यति ।। मैं चन्द्रवंश के अंतर्गत यदुकुल में वसुदेव जी के पुत्ररूप में उत्तपन्न हुआ हूँ ।मुचुकुंद जी ने कहा कि पूर्व काल में गार्ग्य मुनि ने कहा था कि अट्ठाईसवें युग में द्वापर के …

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मध्यकाल में यदुवंशी जादों क्षत्रियों के राज्य—

मध्यकाल में यदुवंशी जादों क्षत्रियों के राज्य– 1-महावन का यदुवंशी राज्य– हिमालय की तराई के जंगलों से होती हुई महमूद गजनवी की तुर्क सेनाओं ने यमुना नदी को भी पार कर लिया।अब वे दक्षिण की ओर अग्रसर हुई , और मथुरा के क्षेत्र में स्थित महावन नगर को उन्होंने संवत 1074 ई0सन 1018 में आक्रान्त …

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मथुरा के यदुवंशी जादों (पौराणिक यादव ) क्षत्रिय राजवंश का ऐतिहासिक अध्ययन–

मथुरा के यदुवंशी जादों (पौराणिक यादव) क्षत्रिय राजवंश का ऐतिहासिक अध्ययन— क्षत्रिय वर्ण से सम्बन्ध ब्रज प्रदेश में प्राचीन काल से निवास करने वाली जातियों में यादवों  (आधुनिक जादों ,भाटी , जडेजा ,बनाफर , जाधव , चुडासमा , वाडियार ) का नाम उल्लेखनीय है । यादवों के मूल पुरुष यदु थे , जिनके नाम पर …

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महाराजा सर भंवरपाल देव बहादुर यदुकुल चन्द्रभाल का शासन को करौली के सतयुग की संज्ञा—

महाराजाधिराज  सर भंवरपाल देव बहादुर ,यदुकुल -चन्द्र भाल  का शासनकाल करौली के सतयुग की संज्ञा— — महाराजा अर्जुनपाल के 1886 में देहान्त होने के बाद भंवर पाल जी  करौली के राजा बने ।महाराजा अर्जुन पाल जी के समय भंवरपाल जी हाडौती के राव थे और इनके नजदीकी भतीजे थे। |इनका जन्म 24 फरवरी 1864 को …

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करौली के महानतम शासक गोपाल सिंह द्वितीय एवं करौली विकास —

करौली के महानतम  शासक गोपाल सिंह द्वितीय एवं करौली का विकास — करौली के इतिहास में महाराजा गोपालदास जी के 135 वर्ष  बाद सन 1724 में  सर्वाधिक प्रभावशाली एवं इकबाल बुलन्द शासक महाराजा गोपालसिंह जी द्वितीय रहे थे। ये महाराजा कुंवरपाल जी के ज्येष्ठ पुत्र थे।अपने पिता के देहांत के बाद सन 1724 ई0 विक्रम …

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