Jadaun

दास्ताने जादों राजपूत रियासत कोटला का इतिहास–

दास्ताने कोटला जादों राजपूत रियासत –— नगर कोटला वसत है, मीन ताल के पास गद्दी राजा सोन की, यदुकुत करत प्रकाश नैक दूर सिरसा नदी, खेरो शांतुन भूप शांतेश्वर महादेव को दर्शन परम अनूप कोटल गांव को सन 1500 में कोटल खां नामक मेवाती ने बसाया था। बयाना के राजा विजयपाल के पुत्र सोनपाल थे …

दास्ताने जादों राजपूत रियासत कोटला का इतिहास– Read More »

यदुवंशी जाधव राजपूतों के प्राचीन देवगिरि दुर्ग का इतिहास —

यदुवंशी जाधव राजपूतों के देवगिरि दुर्ग का इतिहास —- यह स्थान महाराष्ट्र के औरंगबाद जिले में, गोदावरी नदी की उत्तरी घाटी में स्थित है। इसका पूर्वानुमान देवगिरि था, किन्तु मुहम्मद बिन तुगलक ने इसका नाम बदलकर दौलताबाद रख दिया। देवगिरि दक्षिण में यादव वंशी राजाओं की समृद्ध राजधानी थी। यादव पहले चालुक्यों के अधीन थे, …

यदुवंशी जाधव राजपूतों के प्राचीन देवगिरि दुर्ग का इतिहास — Read More »

ब्रज जनपद के जादों (प्राचीन यादव ) कुलीन राजवंश का ऐतिहासिक अध्ययन —

ब्रज जनपद के जादों (प्राचीन यादव )कुलीन राजवंश का ऐतिहासिक अध्ययन — मुस्लिम धर्म के प्रसार व प्रचार के समय भारत की पश्चिमोत्तर सीमाओं पर यादव कुलीन परिवार आबाद थे और इन परिवारों ने मुस्लिम साम्राज्यवादियों की प्रगति को दीर्घकाल तक रोकने में सफलता प्राप्त की। अन्त में यदुवंशी भाटी राजपूतों ने सिन्ध अथवा पंजाब …

ब्रज जनपद के जादों (प्राचीन यादव ) कुलीन राजवंश का ऐतिहासिक अध्ययन — Read More »

करौली के जादों राजवंश के पूर्वजों के शौर्य ,वीरता एवं संघर्ष का प्रतीक है मध्यकालीन ऐतिहासिक दुर्ग तिमनगढ़ (ताहनगढ़ )—

करौली जादों राजवंश के पूर्वजों के शौर्य , वीरता एवं संघर्ष का प्रतीक  ऐतिहासिक मध्यकालीन  दुर्ग तिमनगढ़(ताहनगढ़)—- “अपनी बहुमूल्य सांस्कृतिक एवं कलात्मक धरोहर तथा यदुवंशियों के मुगलों से वीरतापूर्ण गौरवशाली  संघर्ष के इतिहास का प्रतीक है तिमनगढ़ /ताहनगढ़ दुर्ग “।इसे तत्कालीन इतिहासकारों एवं लेखकों ने विभिन्न नामों तमनगढ़ , त्रिभुवनगढ़ ,थंनगढ़ से वर्णित किया है …

करौली के जादों राजवंश के पूर्वजों के शौर्य ,वीरता एवं संघर्ष का प्रतीक है मध्यकालीन ऐतिहासिक दुर्ग तिमनगढ़ (ताहनगढ़ )— Read More »

सांस्कृतिक एवं कलात्मक धरोहर का प्रतीक मध्यकालीन यदुवंशियों का ऐतिहासिक दुर्ग ताहनगढ़ —

सांस्कृतिक एवं कलात्मक धरोहर का प्रतीक  मध्यकालीन यदुवंशियों का ऐतिहासिक दुर्ग ताहनगढ़— बयान से लगभग 23 कि.मी दक्षिण में एक उन्नत पर्वतशिखर पर मध्यकाल प्रसिद्ध दुर्ग ताहनगढ़  (तिमनगढ़) या त्रिभुवनगढ़ स्थित है। दुर्गम पर्वतमालाओं से आवृत , वन सम्पदा  से परिपूर्ण तथा नैसर्गिक सौन्दर्य से सुशोभित इस दुर्भेद्य दुर्ग की अपनी अदभुत निराली ही  शान …

सांस्कृतिक एवं कलात्मक धरोहर का प्रतीक मध्यकालीन यदुवंशियों का ऐतिहासिक दुर्ग ताहनगढ़ — Read More »

यदुकुल शिरोमणि श्रीकृष्ण ,उनका समय एवं जदुवंशियों के विनाश का ऐतिहासिक अध्ययन–

यदुकुल शिरोमणि योगीश्, उनका समय एवं जदुवंशियों का विनाश— ब्रज या शूरसेन जनपद के इतिहास में श्रीकृष्ण का समय बड़े महत्व का है। इसी समय प्रजातंत्र और नृपतंत्र के बीच कठोर संघर्ष हुए, मगध-राज्य की शक्ति का विस्तार हुआ और भारत का वह महाभीषण संग्राम हुआ, जिसे महाभारत युद्ध कहते हैं। इन राजनैतिक हलचलों के …

यदुकुल शिरोमणि श्रीकृष्ण ,उनका समय एवं जदुवंशियों के विनाश का ऐतिहासिक अध्ययन– Read More »

श्री कृष्ण के वंशज यदुवंशी जादों क्षत्रियों के प्राचीन ऐतिहासिक नगर महावन (पौराणिक गोकुल ) का शोध–

श्री कृष्ण जी के वंशज यदुवंशी जादों क्षत्रियों के प्राचीन ऐतिहासिक नगर महावन (पौराणिक गोकुल) का शोध– यमुना पार मथुरा से 14 किमी दूर नीचे की और बहने वाली यमुना की धारा के किनारे पर बसे हुए वर्तमान गोकुल से 4 किलोमीटर आगे, मथुरा से सादाबाद सड़क के सहारे ऊंचे टीले पर सन्निविष्ट महाबन ऐतिहासिक …

श्री कृष्ण के वंशज यदुवंशी जादों क्षत्रियों के प्राचीन ऐतिहासिक नगर महावन (पौराणिक गोकुल ) का शोध– Read More »

मध्यकाल के वास्तविक (पौराणिक ) यादव क्षत्रियों (राजपूतों )का ऐतिहासिक शोध–

मध्यकाल के वास्तविक यादवा चन्द्रवंशी क्षत्रियों (राजपूतों ) का ऐतिहासिक शोध—– वास्तविक (पौराणिक )यादवा क्षत्रिय (राजपूत ) चंद्रवंश के ययाति के पुत्र यदु वंशधर हैं। मनु के चार पुत्रों इक्ष्वाकु, प्रांगु, सुद्युम्न तौर शर्वाति ने भारत में सबसे पहले आर्य -राज्य स्थापित किये । यह घटना लगभग 2000 ई. पूर्व की है। इक्ष्वाकु के वंश …

मध्यकाल के वास्तविक (पौराणिक ) यादव क्षत्रियों (राजपूतों )का ऐतिहासिक शोध– Read More »

जादों राज्य करौली की ऐतिहासिक धरोहरें–

जादों राज्य करौली की ऐतिहासिक धरोहरें—– जादों राजपूतों के करौली राज्य में धार्मिक , प्राकृतिक एवं ऐतिहासिक पर्यटक स्थलों की अधिकता रही है।यहां लगभग एक दर्जन प्राचीन किले तथा चम्बल घाटी के समानान्तर फैला हुआ कैलादेवी अभयारण्य है जो यहाँ की विरासत है। यहाँ के प्राचीन भवनों में मुगल तथा राजपूत शैली की वास्तुकला एवं …

जादों राज्य करौली की ऐतिहासिक धरोहरें– Read More »

Pin It on Pinterest

Translate »
error: Content is protected !!